
Patna News: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था अब नए रूप में दिखाई देगी। वर्षों से चली आ रही कागजी रजिस्टर वाली हाजिरी प्रणाली को बदलते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। अब सभी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति टैबलेट के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि फर्जी हाजिरी, घोस्ट स्टूडेंट्स और उपस्थिति से जुड़े भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी। यह परिवर्तन बिहार की शिक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाने वाला है।
बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति टैबलेट के माध्यम से ली जाएगी। इससे दशकों पुरानी रजिस्टर वाली व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। विभाग के अनुसार, इस नए सिस्टम का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना, उपस्थिति में हेरफेर रोकना और शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मजबूत करना है।
राज्य के लगभग 81,000 सरकारी स्कूलों को टैबलेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्राथमिक और मिडिल स्कूलों को दो-दो टैबलेट जबकि माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों को विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार दो से तीन टैबलेट दिए जाएंगे। पहले चरण में पटना, नालंदा, वैशाली, सारण, भोजपुर और जहानाबाद जिलों के चुनिंदा स्कूलों में यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, जहां छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की गई और परिणाम बेहद सकारात्मक रहे।
नई डिजिटल प्रणाली से हाजिरी की वास्तविकता तुरंत विभाग तक पहुंच जाएगी। इससे यह पता चल सकेगा कि कितने छात्र वास्तव में स्कूल पहुंच रहे हैं और किन स्कूलों की उपस्थिति संदिग्ध है। इसके अलावा, हाजिरी डेटा क्लाउड में सुरक्षित रहेगा जिससे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना खत्म होगी।
हालांकि, दूरदराज के स्कूलों में नेटवर्क और तकनीकी सुविधाओं की कमी चुनौती बन सकती है, लेकिन विभाग का दावा है कि सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से इंटरनेट और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
डिजिटल हाजिरी प्रणाली लागू होने के बाद बिहार की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है। यह बदलाव आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र में कई और सुधारों की राह खोल सकता है।




