
गोवा/बिहार, 23 नवंबर। 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में रविवार को बिहार देश के फिल्म निर्माताओं के लिए सबसे आकर्षक चर्चा का केंद्र रहा। ‘जड़ से जुड़ाव: बिहार में सिनेमा का उदय’ विषय पर आयोजित नॉलेज सीरीज में बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम (बिहार फिल्म निगम) के प्रबंध निदेशक और कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के सचिव प्रणव कुमार (IAS) ने स्पष्ट कहा कि “बिहार में फिल्म नीति केवल छवि बदलने के लिए नहीं, बल्कि फिल्म संस्कृति स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई गई है।”
कार्यक्रम में अभिनेत्री व प्रोड्यूसर नीतू चंद्रा, इम्पा अध्यक्ष व प्रोड्यूसर अभय सिन्हा, अभिनेता विनीत कुमार तथा निर्माता-अभिनेता विकास कुमार उपस्थित रहे। संचालन फिल्म इन्फॉर्मेशन के एडिटर कोमल नाहटा ने किया।
प्रणव कुमार ने बताया कि बिहार में वन विंडो क्लियरेंस, शूटिंग के लिए अनुदान, हर जिले में नोडल अधिकारी, फिल्म–वेब सीरीज–टीवी सीरियल–डॉक्यूमेंट्री को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए गए हैं। राज्य के सभी जिलों में शूटिंग लोकेशन का डेटाबेस तैयार कर लिया गया है, जिसे जल्द VR मोड में देखने की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे बिना रेकी किए भी लोकेशन का चयन आसान हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि बिहार में सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं अब सिर्फ भ्रांतियां हैं। यहां शूटिंग कर चुके निर्माताओं ने हमेशा सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं। राजगीर में फिल्म सिटी बनाने की योजना, वैनिटी वैन व फिल्मी संसाधन एक छत के नीचे उपलब्ध कराने की परियोजना पर भी काम चल रहा है।
इम्पा अध्यक्ष अभय सिन्हा ने कहा कि नई फिल्म नीति से उन्हें अब तक की सबसे बड़ी खुशी मिली है। उन्होंने घोषणा की कि अगले महीने एक साथ तीन फिल्मों की शूटिंग वह बिहार में शुरू करेंगे, साथ ही उन्होंने 40,000 से अधिक प्रोड्यूसर्स से बिहार में फिल्म बनाने की अपील की। उन्होंने राज्य में सेंसर बोर्ड ऑफिस खोलने, और सिंगल स्क्रीन थियेटर में भोजपुरी फिल्मों को अनिवार्य स्क्रीनिंग देने की वकालत की।
सीआईडी फेम अभिनेता विकास कुमार ने कहा कि वह शूटिंग के अलावा, कलाकारों के लिए बिहारी भाषा कोचिंग मुहैया कराने को भी तैयार हैं। अभिनेता विनीत कुमार ने कहा कि फिल्म के लिए विशेष गांव विकसित किए जाएं, ताकि रोजगार और वास्तविकता आधारित सिनेमा दोनों को गति मिले।
नीतू चंद्रा ने कहा कि बिहार की पहचान उसकी स्थानीय भाषाओं—मगही, भोजपुरी, बज्जिका, मैथिली—से ही हो सकती है, और इन्हीं से बिहार को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।




